अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मिलावटी खाद्य पदार्थों की आशंकाओं के बीच बाजार से खरीदे गए रेडीमेड डोसा बैटर ने एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
जानकारी के अनुसार, चांदखेड़ा निवासी विमल प्रजापति और भावना प्रजापति ने स्थानीय डेयरी से डोसे का घोल खरीदा था। इस घोल से बना खाना खाने के बाद पूरे परिवार की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी को तेज उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, जो बाद में फूड पॉइजनिंग में बदल गई।
इस घटना में 3 महीने की मासूम राहा और 4 साल की बच्ची मिश्री की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि माता-पिता भावना और विमल एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं।
3 महीने की बच्ची की मौत पर सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल 3 महीने की बच्ची की मौत को लेकर उठ रहा है, क्योंकि वह ठोस आहार नहीं लेती थी। आशंका जताई जा रही है कि मां द्वारा डोसा खाने के बाद स्तनपान कराने से उसका असर बच्ची तक पहुंचा हो।
परिवार का आरोप
विमल के पिता गौरीशंकर प्रजापति का कहना है कि 1 अप्रैल की रात IOC रोड स्थित एक डेयरी से डोसे का घोल खरीदा गया था। अगली सुबह इसे खाने के बाद पहले विमल की तबीयत बिगड़ी, लेकिन कारण समझ नहीं आया। बाद में उसी घोल से बच्ची को भी डोसा खिलाया गया, जिसके बाद उसकी हालत भी खराब हो गई।
परिवार ने इस पूरे मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
डेयरी मालिक का जवाब
वहीं, डेयरी संचालक केतन पटेल ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि रोजाना बड़ी मात्रा में यही घोल बेचा जाता है और उसी बैच का इस्तेमाल कई लोगों ने किया, लेकिन किसी और को कोई परेशानी नहीं हुई। उनके भाई विपुलभाई के अनुसार, CCTV फुटेज में भी यही सामने आया है कि कई ग्राहकों ने उसी ड्रम से घोल खरीदा था, फिर भी केवल एक ही परिवार प्रभावित हुआ।
फिलहाल, इस पूरे मामले की जांच जारी है और प्रशासन सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है।


