
फरीदाबाद
दिल्ली से लगभग 50 किलोमीटर दूर फरीदाबाद में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया। संयुक्त अभियान के दौरान पुलिस ने एक किराये के मकान से 350 किलो से अधिक अमोनियम नाइट्रेट, दो राइफलें, टाइमर डिवाइस, कारतूस की मैगज़ीनें और वायरिंग उपकरण बरामद किए। जांच में सामने आया कि इस साजिश के पीछे दो डॉक्टर शामिल थे, जिनकी पहचान आदिल अहमद (निवासी: अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर) और मुज़म्मिल शकील (निवासी: पुलवामा) के रूप में हुई है। दोनों का मेडिकल बैकग्राउंड है और इनमें से एक फरीदाबाद की अल-फलह यूनिवर्सिटी में पढ़ाता भी था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क का एक और सदस्य फरार है और उसकी तलाश जारी है।
कैसे फूटा आतंकी मॉड्यूल?

27 अक्टूबर को श्रीनगर में जैश-समर्थक पोस्टर लगाए जाने के बाद सुराग मिलने पर जांच तेज हुई; 29 अक्टूबर के सीसीटीवी फुटेज में डॉक्टर आदिल अहमद की तस्वीर मिलने के बाद उसे निशाना बनाया गया। 6 नवंबर को सहारनपुर से आदिल को गिरफ्तार कर ट्रांज़िट रिमांड पर जम्मू-कश्मीर पुलिस को सौंपा गया, और गहन पूछताछ में उसकी निशानदेही से नेटवर्क की कड़ियाँ जुड़नी शुरू हुईं। पूछताछ में मिले संकेतों के आधार पर जांचकर्ताओं को एक बैंक लॉकर और फरीदाबाद में छिपाए गए संसाधनों तक पहुंच का पता चला, जिसके नतीजे में 10 नवंबर को फरीदाबाद के किराये के मकान से 350 किलो से अधिक अमोनियम नाइट्रेट, दो राइफलें और टाइमर-वॉकी-टॉकी जैसे उपकरण बरामद हुए — इस प्रकार एक व्यापक, कई चरणों में चलने वाली आतंकवादी साजिश की परतें खुलीं।
छापेमारी में क्या-क्या मिला?
- 350+ किलो अमोनियम नाइट्रेट
- 2 रायफलें
- कारतूस की कई मैगज़ीनें
- 20 टाइमर डिवाइस
- बैटरियाँ, वॉकी-टॉकी और वायरिंग उपकरण
जांच में यह भी सामने आया कि पहले एक बैंक लॉकर से हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी।
फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर का बयान
फरीदाबाद पुलिस कमिश्नर ने बताया कि छापेमारी के दौरान जिस विस्फोटक सामग्री को बरामद किया गया है, वह आरडीएक्स नहीं बल्कि अमोनियम नाइट्रेट है। उन्होंने कहा कि किराये के मकान से दो राइफलें, कई मैगज़ीनें, वॉकी-टॉकी, टाइमर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिले हैं, जिन्हें विस्फोटक बनाने और उसके संचालन के लिए रखा गया था। कमिश्नर के अनुसार, यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त ऑपरेशन का हिस्सा थी और बरामदगी के बाद स्पष्ट है कि सामग्री को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की योजना थी। उन्होंने यह भी कहा कि जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी इस विस्फोटक का इस्तेमाल कहाँ और किस उद्देश्य से करना चाहते थे।
जांच जारी, आतंकियों के नेटवर्क को पकड़ने का अभियान तेज
सुरक्षा एजेंसियाँ अब यह जानने में जुटी हैं कि उनका टारगेट कौन सा स्थान था और ऑपरेशन को किस स्तर पर अंजाम दिया जाना था।
पुलिस की प्राथमिक जांच के अनुसार:
- आरोपी सोशल मीडिया और मेडिकल नेटवर्क के जरिए छिपकर काम कर रहे थे।
- विस्फोटक एक ही स्थान पर जमा किया जा रहा था।
- सामग्री को छोटे हिस्सों में विभाजित कर आगे भेजने की तैयारी थी।










