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बांदा में बच्चों के शोषण मामले में पति-पत्नी को फांसी की सजा सुनाई गई, रिश्तेदार और किरायेदारों के बच्चों को भी बनाया शिकार

क्या था पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के बांदा और चित्रकूट क्षेत्र से जुड़े इस सनसनीखेज मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने आरोपी दंपती—रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती—को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) के अनुसार, वर्ष 2010 से 2020 के बीच आरोपियों ने कई मासूम बच्चों का यौन शोषण किया और आपत्तिजनक सामग्री तैयार की। अभियोजन के दौरान 50 से अधिक पीड़ित बच्चों ने अदालत में बयान दर्ज कराए, जिसके आधार पर अदालत ने अपराध को “दुर्लभतम” मानते हुए कड़ा फैसला सुनाया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुलासा कैसे हुआ?

मामले का खुलासा तब हुआ जब अंतरराष्ट्रीय एजेंसी INTERPOL को डिजिटल माध्यमों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली। जांच में आरोपियों के फोन नंबर, ईमेल आईडी, फोटो और वीडियो जैसे डिजिटल साक्ष्य जुटाए गए, जिन्हें आगे कार्रवाई के लिए सीबीआई को सौंपा गया। बताया गया कि आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें डार्क वेब के जरिये अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कजाकिस्तान और बांग्लादेश समेत 47 देशों तक साझा की गई थीं।

छापेमारी और डिजिटल सबूत

सीबीआई ने 2020 में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव और बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा बरामद किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि सामग्री को ऑनलाइन स्टोरेज प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखा जाता था। बरामद पेन ड्राइव में दर्जनों वीडियो और सैकड़ों फोटो पाए गए, जो केस के अहम साक्ष्य बने।

रिश्तेदारों और परिचितों के बच्चों को भी बनाया निशाना

आरोप है कि दंपती ने परिचितों, रिश्तेदारों और किरायेदारों के बच्चों को बहला-फुसलाकर शिकार बनाया। बच्चों को मोबाइल फोन, चॉकलेट या अन्य लालच देकर अपने प्रभाव में लिया जाता था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़ितों में कुछ बच्चे बेहद कम उम्र के थे। अदालत में दर्ज बयानों और मेडिकल साक्ष्यों ने मामले को और मजबूत किया।

अदालत का फैसला और मुआवजा

लंबी सुनवाई के बाद 18 फरवरी 2026 को दोनों को दोषी करार दिया गया और मृत्युदंड सुनाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि दोषियों की संपत्ति और जब्त नकदी से प्रत्येक पीड़ित परिवार को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए। करीब पांच साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवारों के लिए अहम न्याय माना जा रहा है।

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