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सनसनीखेज खुलासा! हरियाणा में आधे से ज़्यादा रेप केस ‘झूठे’, ब्लैकमेलिंग गिरोह सक्रिय-SCRB

गुरुग्राम पुलिस ने ब्लैकमेलिंग करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया
गुरुग्राम में पुलिस ने एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश किया है, जो पुरुषों को फंसाने के लिए झूठी यौन उत्पीड़न की कहानियाँ गढ़ता था। यह गिरोह फेक शिकायत दर्ज कराने के बाद पैसों की मांग करके ब्लैकमेल करता था।

इसी संदर्भ में राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) की ताज़ा रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आँकड़े जारी किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में हरियाणा में दर्ज बलात्कार और उसके प्रयास से जुड़े मामलों में बड़ी संख्या फर्जी पाई गई है।

  • बलात्कार के मामलों में: पुलिस द्वारा जांच पूरी किए गए 1,798 मामलों में से 814 मामले असत्य पाए गए।
  • बलात्कार के प्रयास: दर्ज 216 प्राथमिकी में से 124 शिकायतें फर्जी निकलीं।

रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में दर्ज झूठी शिकायतों के अनुपात में हरियाणा देश में सबसे ऊपर है।

इस मामले के सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस ने राज्य में दर्ज ऐसे मामलों की समीक्षा की, जिसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 में हरियाणा में दर्ज बलात्कार और बलात्कार के प्रयास के कई मामलों की जांच पूरी होने पर पता चला कि बड़ी संख्या में यह शिकायतें सच नहीं थीं।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:

  • साल 2023 में हरियाणा पुलिस ने बलात्कार के कुल 1,798 मामलों की जांच पूरी की, जिनमें से 814 केस झूठे पाए गए।
  • इसी वर्ष दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े 216 मामलों की जांच की गई, जिनमें से 124 शिकायतें फर्जी साबित हुईं।

इस तरह, राज्य में बलात्कार के 45.3% मामलों और बलात्कार के प्रयास के 57.4% मामलों में तथ्य नहीं मिले।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध की श्रेणी में फर्जी मामलों की संख्या के मामले में हरियाणा देश में सबसे आगे है।

अन्य राज्यों की स्थिति इस प्रकार रही—

राज्यझूठी शिकायतों का प्रतिशत
हरियाणासर्वाधिक
राजस्थान व जम्मू-कश्मीर28.5%
छत्तीसगढ़20.7%
हिमाचल प्रदेश18.3%
मध्य प्रदेश18.3%
पंजाब15.9% (5,985 में से 952 शिकायतें झूठी)

राष्ट्रीय स्तर पर, महिलाओं के खिलाफ अपराध की श्रेणी में 7.9% शिकायतें फर्जी पाई गईं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि झूठी एफआईआर न सिर्फ न्यायिक प्रक्रियाओं पर बोझ बढ़ाती हैं, बल्कि असल पीड़ितों की आवाज भी कमजोर करती हैं। इसलिए ऐसे मामलों पर कड़ी कार्रवाई और सख्त जांच प्रक्रिया की आवश्यकता है।

Source – Punjab Kesri Haryana

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