
अंबाला के साहा क्षेत्र से सटे गांव साबापुर के 26 वर्षीय नारायण की रूस में उपचार के दौरान मौत हो गई। हजारों किलोमीटर दूर परिजनों का इकलौता सहारा जिंदगी की जंग हार गया, जबकि घर में स्थिति यह है कि परिवार उसके पार्थिव शरीर को भारत लाने तक का खर्च भी नहीं उठा पा रहा। मजबूर परिवार ने सरकार और समाजसेवी लोगों से आर्थिक सहायता की अपील की है, ताकि नारायण का अंतिम संस्कार उसके अपने वतन में किया जा सके।
मिली जानकारी के अनुसार, साबापुर निवासी नारायण कुछ समय पहले स्टडी वीजा पर बेहतर भविष्य की उम्मीदों के साथ रूस गया था। परिवार सोच रहा था कि पढ़ाई के बाद नारायण अच्छी नौकरी करेगा और घर की हालत सुधारने में मदद करेगा, लेकिन उसे विदेश में ही गंभीर बीमारी ने घेर लिया। इलाज चल रहा था, पर हालत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। कम उम्र में बेटे के निधन की खबर आते ही गांव में शोक फैल गया।
नारायण के पिता रविंद्र का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा परदेस में ही दुनिया को अलविदा कह देगा। परिवार पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर है और अब बेटे का शव वापस लाने का खर्च उठाना भी उनके लिए असंभव हो गया है।
परिजन स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार और दानदाताओं से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि नारायण का शव भारत लाया जा सके और उसे अंतिम विदाई दी जा सके।










