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सरपंच पिता की हो गई मौत, पिता की विरासत के लिए 3 सगे भाई मैदान में उतरे… देंगे एक दूसरे को चुनौती, बढ़ी राजनीतिक हलचल

हरियाणा के बहादुरगढ़ के गांव बाढ़सा में सरपंच पद का उपचुनाव इस बार खासा चर्चा में है। यह चुनाव सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया नहीं रह गया, बल्कि एक ही परिवार के तीन भाइयों के बीच सीधी टक्कर बन गया है। पूर्व सरपंच ज्ञानचंद के निधन के बाद खाली हुई सीट पर उनके तीनों बेटे—दीपक, रमेश और मनोज—अपनी-अपनी दावेदारी लेकर मैदान में उतर आए हैं। इससे गांव की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है।

सरपंच पिता की मौत के बाद होगा उपचुनाव

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2022 में ज्ञानचंद को ग्रामीणों ने सरपंच चुना था, लेकिन मई 2025 में उनके निधन के बाद पद रिक्त हो गया। अब इस सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। बाढ़सा ग्राम पंचायत में करीब 3450 मतदाता हैं और यह सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित है।

हालांकि चुनाव में कुल नौ उम्मीदवार हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा सुर्खियां ज्ञानचंद के तीनों बेटों की आपसी टक्कर को लेकर बन रही हैं। गांव में यह चर्चा जोरों पर है कि जो बेटे पहले अपने पिता के लिए वोट मांगते थे, अब वही खुद के लिए समर्थन जुटा रहे हैं।

तीनों बेटे अलग अलग दावेदारी कर रहे हैं

सबसे बड़े बेटे दीपक का कहना है कि उन्होंने अपने पिता के कार्यकाल में हर कदम पर उनका साथ दिया और पंचायत के कामकाज को अच्छी तरह समझते हैं। उनका उद्देश्य पिता के अधूरे विकास कार्यों को पूरा करना है। वहीं मंझले बेटे रमेश पेशे से वकील हैं और गुरुग्राम में प्रैक्टिस करते हैं। उनका मानना है कि वे शिक्षा और अनुभव के आधार पर गांव की बेहतर सेवा कर सकते हैं।

सबसे छोटे बेटे मनोज, जो स्नातक हैं, का कहना है कि उनका अपने पिता से खास जुड़ाव रहा है और वे भी पंचायत के कार्यों में सक्रिय रहे हैं। उनका दावा है कि परिवार के कुछ सदस्य उनका समर्थन कर रहे हैं।

तीनों भाइयों के मैदान में उतरने से परिवार के भीतर मतभेद की स्थिति जरूर बनी है, लेकिन उनका कहना है कि बड़े-बुजुर्ग परिवार को एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं और अंत में जो भी फैसला होगा, सभी उसका सम्मान करेंगे। इस दिलचस्प मुकाबले ने पूरे गांव की नजरें इस उपचुनाव पर टिका दी हैं।

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