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मौत के बाद भी आर्मी के लिए हीरो बना 16 साल का हर्ष, पानीपत में हुई दुर्घटना में हो गया था ब्रेन डेड, रोहतक में पहली बार ऑर्गन एयरलिफ्ट।

हरियाणा के रोहतक में पहली बार रविवार को एक ब्रेन डेड किशोर के अंगों को एयरलिफ्ट कर ट्रांसप्लांट के लिए भेजा गया, इस प्रक्रिया के तहत एक किडनी इंडियन आर्मी के हेलीकॉप्टर के जरिए पंचकूला पहुंचाई गई, जहां इसे एक सेना के जवान की पत्नी को प्रत्यारोपित किया जाएगा। किडनी लेने के लिए कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर की मेडिकल टीम पीजीआईएमएस रोहतक पहुंची थी।

इसी दौरान किशोर का लीवर नई दिल्ली के आईएलबीएस (इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज) भेजा गया, जिसके लिए प्रशासन ने ग्रीन कॉरिडोर बनाया। अन्य अंगों का प्रत्यारोपण पीजीआईएमएस रोहतक में ही किया जाएगा। खास बात यह है कि एक महीने के भीतर यह तीसरा सफल ऑर्गन ट्रांसप्लांट है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड माना जा रहा है।

हादसे में पिता की मौत, पुत्र ऑर्गन डोनर हर्ष भी हुआ था घायल

दरअसल, करनाल के रहने वाले 16 वर्षीय हर्ष 15 अप्रैल को पानीपत के समालखा के पास एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हादसे में उनके पिता की मौके पर ही मौत हो गई थी। हर्ष को गंभीर सिर की चोटों के चलते पीजीआईएमएस रोहतक में भर्ती कराया गया, लेकिन उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई।

22 अप्रैल को डॉक्टरों ने उनमें ब्रेन डेड के लक्षण देखे और 23 अप्रैल तक यह साफ हो गया कि उनके बचने की संभावना बेहद कम है। इसके बाद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तय प्रक्रिया के तहत दो बार एप्निया टेस्ट और अन्य क्लिनिकल जांच की, जिनमें ब्रेन स्टेम की कोई गतिविधि नहीं पाई गई।

शनिवार रात किशोर के परिजन ऑर्गन डोनेट के लिए हुए राजी

जब डॉक्टरों ने परिजनों को स्थिति समझाई और अंगदान के महत्व के बारे में बताया, तो शनिवार रात को परिवार ने सहमति दे दी। इसके बाद सोटो और नोटों के जरिए विभिन्न अस्पतालों को अंग आवंटित किए गए।

रविवार सुबह करीब 6 बजे से अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू हुई। विभिन्न अस्पतालों की टीम रोहतक पहुंची और पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। दोपहर में किडनी को तेजी से हेलीपेड तक पहुंचाया गया और हेलीकॉप्टर के जरिए उसे पंचकूला भेज दिया गया।

इस किशोर के शरीर से दो कॉर्निया, दो किडनी और एक लीवर निकाला गया। हालांकि दिल के लिए चेन्नई से मांग आई थी, लेकिन वहां की टीम समय पर नहीं पहुंच सकी। स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के प्रयासों से कई लोगों को नई जिंदगी मिल रही है और प्रदेश में अंगदान को लेकर जागरूकता भी बढ़ रही है।

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